लखनऊ: सीडीआरआई लखनऊ के पूर्व डायरेक्टर और पद्मश्री अवॉर्डी डॉ. नित्या आनंद का 99 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद 29 नवंबर 2023 को एसजीपीजीआई लखनऊ के आईसीयू में भर्ती किया गया था। तभी से उनका इलाज एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा था। इस बीच इन्फेक्शन बढ़ने के साथ उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट भी दिया गया। शनिवार को इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. नित्या आनंद, केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के पिता हैं। उनके निधन से केजीएमयू, लोहिया संस्थान समेत सीडीआरआई जैसे संस्थानों में शोक की लहर दौड़ गई। डॉ. नित्या आनंद का नाम देश के टॉप ड्रग रिसर्च साइंटिस्ट में रहा है। दुनिया की पहली नॉन स्टेरॉयड कंट्रासेप्टिव पिल (सहेली) को बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। इसके अलावा मलेरिया, कुष्ठ रोग और टी.बी. जैसे गंभीर रोगों के इलाज में सहायक ड्रग की खोज करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
डॉ. नित्या आनंद साल 1974 से 1984 तक सीडीआरआई लखनऊ के निदेशक रहे। डॉ. नित्या के बनाए ड्रग को सीडीआरआई ने साल 1991 में ‘सेंटक्रॉमैन’ के नाम से रिलीज किया था। बाद में हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड ने ‘सहेली’ नाम से इसे बाजार में उतारा। इस दवा ने महिलाओं को गर्भ निरोधक इंजेक्शन से मुक्ति दिलाई। इसकी सबसे बड़ी खूबी थी कि महिलाओं में कोई साइड इफेक्ट नहीं होता था।
डॉ. नित्या आनंद के बारे में……
डॉ. नित्या आनंद का जन्म 1 जनवरी, 1925 को पश्चिमी पंजाब के लायलपुर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनके पिता भाई बालमुकुंद लायलपुर के कृषि महाविद्यालय में भौतिकी और गणित के प्रोफेसर थे, जबकि मां विधवाओं और निराश्रित महिलाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने वाली एक संस्था की मानद प्रिंसिपल थीं। उनके माता-पिता दोनों सामाजिक कार्यों और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे। 10वीं तक की उनकी शिक्षा धनपतमल एंग्लो-संस्कृत हाई स्कूल, इंटरमीडिएट साइंस गवर्नमेंट इंटर कॉलेज, लायलपुर से हुई। इसके बाद बीएससी लाहौर से किया। इस बीच 1943 में उनके परिवार ने भारत आने का फैसला किया। फिर वो अपने माता-पिता के साथ दिल्ली चले आए।
डॉ. नित्या आनंद ने एमएससी की पढ़ाई सेंट स्टीफंस कॉलेज से रसायन विज्ञान में पूरी की। फिर प्रोफेसर के. वेंकटरमन के साथ कार्बनिक रसायन विज्ञान में शोध के लिए यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी बॉम्बे चले गए। जहां उन्हें 1948 में पीएचडी की डिग्री से सम्मानित किया गया। 1951 में सीडीआरआई लखनऊ में किया था जॉइन 1950 में कैम्ब्रिज से दूसरी पीएचडी डिग्री हासिल करने के बाद डॉ. नित्या आनंद देश लौटे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के मेडिसिनल केमिस्ट्री डिवीजन में उन्होंने जॉइन किया। मार्च 1951 में उन्होंने सीडीआरआई लखनऊ जॉइन किया। यहां उनका पहला प्रोजेक्ट कुष्ठ रोग के इलाज में कारगर ड्रग खोजने को लेकर रहा। बाद में साल 1974 से 1984 तक वो सीडीआरआई के निदेशक रहे।