Cabinet Decision : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 936 किलोमीटर की कुल लंबाई वाले 8 नेशनल हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के निर्माण को मंजूरी दे दी है। सरकार ने कहा कि इन 8 हाइवे प्रोजेक्ट्स पर कुल 50,655 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सरकार ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि भूमि अधिग्रहण की कम से कम जरूरत पड़े। इन प्रोजेक्ट्स से आगरा और ग्वालियर के बीच यात्रा का समय 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।
केंद्रीय सूचना मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि जहां तक संभव होगा प्रोजेक्ट्स को ब्राउनफील्ड से जोड़ा जाएगा। इन परियोजनाओं को लेकर सरकार का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार और भीड़भाड़ को कम करना है। साथ ही देशभर में कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।
पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में खड़गपुर-मोरेग्राम कॉरिडोर बड़ी भूमिका निभाएगा। वहीं कानपुर रिंग रोड द्वारा कानपुर के आसपास हाइवे नेटवर्क को भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी। रायपुर रांची कॉरिडोर के पूरा होने के माध्यम से झारखंड और छत्तीसगढ़ के विकास को तेजी मिलेगी। बंदरगाह कनेक्टिविटी और कम रसद लागत के लिए गुजरात में हाई स्पीड रोड नेटवर्क को पूरा करने के लिए थराद और अहमदाबाद के बीच नया कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। उत्तर-पूर्व तक निर्बाध पहुंच की सुविधा के लिए गुवाहाटी रिंग रोड को विकसित किया जाएगा।
रिंग रोड लखनऊ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, अयोध्या हवाई अड्डे और शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को निर्बाध कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगी। पुणे और नासिक के बीच 8-लेन एलिवेटेड फ्लाईओवर कॉरिडोर सेक्शन लॉजिस्टिक दक्षता सुधार में बड़ी भूमिका निभाएगा। इसी के साथ, राष्ट्रीय राजमार्गों का औसत वार्षिक निर्माण भी 2004-14 में लगभग 4,000 किमी से लगभग 2.4 गुना बढ़कर 2014-24 में लगभग 9,600 किमी हो गया है। निजी निवेश सहित राष्ट्रीय राजमार्गों में कुल पूंजी निवेश 2013-14 में 50,000 करोड़ रुपये से 6 गुना बढ़कर 2023-24 में लगभग 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गया है।