शाहाबाद/हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टालरेंस की नीति को लागू कराने वाले जिम्मेदार ही भ्रष्टाचारियों को बचाने में लग जाये तो जीरो टालरेस की नीति कैसे लागू होगी। यह अपने आप में बड़ा सवाल है। टोडरपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत चठिया की महिला ग्राम प्रधान राजवती द्वारा बर्ष 2022-23 में वर्क आईडी 64888471 के माध्यम से सामुदायिक भवन के कायाकल्प पर 4 लाख 34 हजार 98 रुपया ख़र्च किया लेकिन सामुदायिक भवन की दीवारें व फर्श तक नहीं बन सकी। टूटी फर्श में चमकती ईंटें व दीवारों से झड़ता प्लास्टर यह गड़बड़झाला उजागर करने के लिए काफी है।
इतना ही नहीं इसी वित्तीय वर्ष में इस भवन में इलेक्ट्रिक वर्क के लिए वर्क आईडी 67355908 से 1,94,697 रुपया खर्च किया गया लेकिन इन रुपयों में भवन तक खम्भे से एक केबिल तक नहीं बांधा जा सका। इसी प्रकार इसी वित्तीय वर्ष में वर्क आईडी 87481040 से बाउंड्री वॉल के लिए 2,64,893 रु खर्च किया गया। लेकिन बाउंड्री वॉल की जगह केवल पिलर के सहारे एक जाली बांधकर बाउंड्री वॉल का पैसा हजम कर लिया गया। इस प्रकार कुल मिलाकर ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने सामुदायिक भवन में 8,93,688 रुपया खर्च कर दिया। लेकिन सामुदायिक भवन बदहाली से बाहर नहीं आ सका।
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फोटो: – काम के बाद की फोटो जिसमें गेट दिख रहा है, मजदूर काम कर रहे हैं |
इसी गड़बड़झाले का खुलासा जब अखबारों की सुर्खियां बना तो आनन फानन में खण्ड विकास अधिकारी टोडरपुर अरविंद वर्मा ने एक जांच टीम गठित कर जांच के आदेश दिये। लेकिन जांच कराकर कार्यवाही करने के बजाय ग्राम प्रधान को भवन की दुरुस्ती का मौका देकर उसको बचाने की कोशिश की जा रही है। प्रधान द्वारा कल से गर्दन फंसते देख सामुदायिक भवन में गेट व अन्य कार्य कराने शुरू कर दिये है।बीडीओ व जांच टीम इस भ्रष्ट प्रधान को बचाकर खबरों को गलत साबित करने में जुट गया है जबकि विधि व्यवस्था के अनुसार गड़बड़ी करने पर तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था दी गयी है।
लेकिन बीडीओ की कार्यशैली देखकर तो यह कहा जा सकता है कि क्या बीडीओ भी इस गड़बड़ झाले में संलिप्त हैं। तभी कार्यवाही न कर उसको बचाने की जुगत कर रहें हैं। आखिर प्रधान को भवन की दुरुस्ती का मौका देकर बीडीओ क्या साबित करना चाह रहें हैं ? उप्र सरकार व जिला प्रशासन को इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर कार्यवाही सुनिश्चित करना चाहिए।
रिपोर्ट- राम प्रकाश राठौर