नोएडा: दिवाली पर जमकर हुए आतिशबाजी के बाद नोएडा, गाजियाबाद के बाद अन्य शहरों की आबोहवा भी ख़राब हुई है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है। लेकिन वाराणसी में दिवाली के बाद भी एयर क़्वालिटी इंडेक्स (AQI) में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है। वहीं नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। दिवाली से पहले तक शहर का AQI 220 से कम था, लेकिन अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार यह 295 तक पहुंच गया है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी उत्सव शर्मा के अनुसार यह स्तर वायु गुणवत्ता के लिए चिंता का विषय है और स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार (1 नवम्बर) की सुबह वाराणसी में AQI का स्तर 144 तक पहुंच गया है। शहर के मलदहिया स्टेशन पर यह एयर क़्वालिटी इंडेक्स रिकॉर्ड किया गया है। वहीं गुरुवार को यहां एयर क़्वालिटी इंडेक्स 110 रहा।
इसके अलावा भेलूपुर स्टेशन पर शुक्रवार की सुबह AQI का स्तर 126 रहा, जहां दिवाली के शाम को 86 रिकॉर्ड किया गया था। वहीं बीएचयू स्टेशन पर आज एयर क़्वालिटी इंडेक्स 51 रिकॉर्ड किया गया, जो गुरुवार को 44 था। जानकारों की मानें तो अगले 24 घंटे में वाराणसी से सभी स्टेशन पर AQI का स्तर 100 के नीचे आ सकता है।
नोएडा में पहले से ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) का दूसरा स्तर लागू है, लेकिन अगर AQI में इसी प्रकार बढ़ोतरी होती रही तो जल्द ही ग्रेप 3 लागू करना पड़ सकता है। इसके अंतर्गत शहर में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी जाएगी। ग्रेप 3 का उद्देश्य प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कठोर कदम उठाना है, ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
शुक्रवार की सुबह नोएडा में एयर क़्वालिटी इंडेक्स 281 तक पहुंच गया। वहीं गाजियाबाद में AQI का लेवल 333 रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा यूपी के राजधानी लखनऊ के इंड्रस्ट्रीयल एरिया में AQI का स्तर 337 तक पहुंच गया, जबकि शहरी क्षेत्र में AQI का स्तर 244 रिकॉर्ड हुआ।
उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के सबसे खराब स्थिति वाले जिलों में मेरठ और हापुड़ हैं, जहां AQI 268 तक पहुंच चुका है। सहारनपुर भी 260 AQI के साथ खतरनाक स्थिति में है। अन्य जिलों में पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली और बदायूं का AQI 254 तक पहुंच गया है, जबकि बुलंदशहर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और रामपुर भी 206 से 252 के बीच AQI स्तर पर हैं। ये सभी जिले “बीमारू श्रेणी” में आते हैं, जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
वहीं कुछ जिलों में वायु गुणवत्ता की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। मिर्जापुर में AQI 116, जौनपुर में 132 और हाथरस में 155 दर्ज किया गया है। इसके अलावा, गोरखपुर में 173, झांसी में 176, कानपुर में 195, लखनऊ में 178, और मथुरा में AQI 152 पर है। हालांकि, ये जिले भी स्वस्थ्य श्रेणी से दूर हैं और प्रदूषण का स्तर यहां भी चिंताजनक बना हुआ है।
AQI का स्तर 300 से 400 के बीच आने पर “खतरनाक” और 400 से अधिक होने पर “गंभीर” श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि अस्थमा और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोग विशेष सतर्कता बरतें। इस समय घर के अंदर रहने और मास्क का उपयोग करने की सिफारिश की गई है। धूल और धुएं के कणों का उच्च स्तर सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।