Moharram 2024 : इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत की याद में मनाया जाने वाला गम का त्योहार मोहर्रम का आगाज 7 या 8 जुलाई को ( चंद्र दर्शन के अनुसार) होगा। इसके पहले चांद की 29 तारीख (6 जुलाई) को शहर के सभी इमामबाड़े सजाए जाएंगे और आगाजे मोहर्रम की मजलिसें होंगी। वाराणसी में शनिवार से शहर के सैकड़ों इमामबाड़ों को सजाया जाएगा और फिर मजलिसें होंगी। आज ही के दिन सुहागिन अपनी चूड़ियां, जेवर और सुहाग की निशाने इमाम हुसैन के गम में उतार देंगी।
1445 साल पहले यजीद ने किया था इमाम हुसैन व उनके 71 साथियों को शहीद
इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की 10 तारीख को आशूरा मनाया जाएगा। इस संबंध में शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि ‘आज से 1445 साल पहले यजीद ने इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को करबला की जमीन पर भूखा और प्यासा शहीद कर दिया था। उसी की याद में मुसलमान 2 महीना 8 दिन तक गम मनाते हैं। शनिवार को यदि चांद दिखा तो रविवार से मोहर्रम शुरू होगा। वरना सोमवार को एक मोहर्रम होगी।
सुहागिनें तोड़ेंगी चूड़ियां, नहीं होगा कोई खुशी का काम
शिया जुमा जमात सैयद जफर हुसैन हुसैनी ने बताया कि ‘इमाम हुसैन के गम में पूरे दुनिया शोकाकुल हो जाएगी। जहां-जहां भी शिया सम्प्रदाय के लोग हैं वो मजलिसों और जुलूस का आयोजन करेंगे। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन के गम में सम्प्रदाय की सुहागिन औरतें अजाखानों में अपने सुहाग की निशाने चूड़ियां तोड़ देंगी। इमाम हुसैन के गम में 2 महीना 8 दिन किसी भी प्रकार का श्रृंगार नहीं करेंगी। शिया सम्प्रदाय में किसी भी प्रकार का खुशी का काम इस दौरान नहीं होगा।
शहर में होगी इस्तेकबाले अजा की मजलिसें
हाजी फरमान हैदर ने बताया कि 29 जिलहिज्जा ( शनिवार,6 जुलाई) को पूरे शहर के इमामबाड़े सजा दिए जाएंगे। मगरिब बाद सभी इमामबाड़ों में इस्तेकबाल ए अजा की मजलिसें होंगी। इसके बाद मजलिसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वाराणसी के दालमंडी, नई सड़क, शिवाला, दोषीपुरा, चौहट्टा लाल खां, मुकीमगंज, गौरीगंज, रामनगर, शिवपुर, अर्दली बाजार, बजरडीहा, लल्लापुरा, मदनपुरा आदि मुस्लिम बहुल इलाकों में शिया सम्प्रदाय 2 महीना 8 दिन तक गम में डूब जाएगा।