चित्रकूट: चित्रकूट में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। ससुराल से लापता हुई महिला को मायके वालों ने मृत मान लिया और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया। मगर हकीकत कुछ और ही निकली। मऊ थानांतर्गत एक गांव में रहने वाली विवाहिता 26 फरवरी को अचानक ससुराल से गायब हो गई। ससुराल वालों ने 29 फरवरी को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 6 मार्च को पहाड़ी थाने के बाबूपुर गांव के पास एक अज्ञात महिला का शव मिला, जिसे मायके वालों ने अपनी बेटी का शव बताकर अंतिम संस्कार कर दिया।
शव को देखते ही पति और ससुराल वालों ने यह दावा किया कि यह उनकी बहू का शव नहीं है। इसके बावजूद मायके वालों ने दहेज उत्पीड़न और हत्या के आरोप में ससुराल वालों पर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने गिरफ्तारी की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन ससुराल वालों ने डीएनए जांच की मांग की। ससुराल वालों की कोशिशें रंग लाई और 7 दिसंबर को कौशांबी के धाता रेवई गांव में विवाहिता जिंदा मिली। विवाहिता ने पुलिस को बताया कि उसे अगवा कर बेच दिया गया था।
उसने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने उसे बाइक से ले जाकर बंधक बना लिया और उसके जेवर भी छीन लिए। वहीं ससुराल वालों ने एसपी अरुण कुमार सिंह से न्याय की गुहार लगाई। एसपी ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई और डीएनए जांच का आदेश दिया। पुलिस ने अब पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। डीएनए जांच भी पूरी होने वाली थी, लेकिन विवाहिता के जिंदा मिलने से नया मोड़ आ गया है।