नफरतवादी लोग देश में बड़े पैमाने पर इंसान और भाषा को धर्म के आधार पर विभाजित करने पर लगे हुए हैं. पिछले कुछ समय से ये लोग भाषा को भी धर्म के आधार पर बांटने लगे है. इसी क्रम में इन लोगों ने उर्दू भाषा को विदेश और मुसलमानों से जोड़ना चाहा है. याचिका एक पूर्व पार्षद ने दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया.
कोर्ट ने भाषा को संवाद का माध्यम बताया और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही पाया. सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र की स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा साइनबोर्ड पर मराठी के साथ उर्दू भाषा का प्रयोग सही है.