आज साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण होगा। नासा के अनुसार, यह आंशिक सूर्य ग्रहण यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका तथा आर्कटिक के कुछ क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। भारत में यह नहीं दिखाई देगा क्योंकि इस दौरान चंद्रमा की छाया भारतीय उपमहाद्वीप तक नहीं पहुंचेगी। कुछ स्थानों पर यह ग्रहण सूर्योदय के साथ मेल खाएगा, जिससे दो सूर्योदय जैसा दृश्य देखने को मिलेगा। जैसे ही सूर्य उदय होगा, ग्रहण पहले से ही जारी रहेगा और जब यह समाप्त होगा, तब सूर्य फिर से उदय होता हुआ प्रतीत होगा जिससे यह अनूठी खगोलीय घटना बनेगी।
समय के अंतर, तारामंडल की स्थिति और पृथ्वी व चंद्रमा के संरेखण (एलायनमेंट) के कारण यह भारत में नहीं देखा जा सकेगा, लेकिन खगोलीय परिस्थितियों के मद्देनजर आंशिक सूर्य ग्रहण की भारत में 2:20 बजे शुरुआत होगी। भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण आज दोपहर 2 बजकर 21 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। सूर्य ग्रहण का मध्य समय दोपहर 4 बजकर 17 मिनट पर होगा। इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 53 मिनट की रहने वाली है।
क्यों खास ये सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण मीन राशि और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। यह सूर्य ग्रहण बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि कल ही शनि का गोचर भी होने जा रहा है। साथ ही, इस ग्रहण के दौरान मीन राशि में 5 ग्रहों का मिलन हो रहा है। इसके अलावा, सूर्य और शनि ग्रह तीन दशकों के बाद एक ही वर्ष में दो बार युति बना रहे हैं।
ग्रहण देखने में सावधानी बरतें
नासा के अनुसार ग्रहण देखने के लिए विशेष सोलर व्यूअर या ग्रहण चश्मे का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि साधारण धूप के चश्मे सूर्य की तेज किरणों से आंखों की सुरक्षा नहीं कर सकते। कैमरा लेंस, दूरबीन या अन्य ऑप्टिकल डिवाइस के माध्यम से बिना फिल्टर के सूर्य को न देखें, क्योंकि इससे आंखों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। दुनिया भर के 9.94 फीसदी यानी 81.4 करोड़ से अधिक लोगों को यह आंशिक सूर्य ग्रहण नजर आएगा। हालांकि ग्रहण के चरम बिंदु को देखने का अवसर मात्र 44,800 लोगों को ही मिलेगा।
क्या सूतक काल माना जाएगा
29 मार्च यानी कल लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। भारत में नजर ना आने की वजह से इस बार सूतक के नियम नहीं माने जाएंगे। साथ ही ग्रहणकाल के दौरान मांगलिक कार्यों पर भी रोक नहीं लगेगी। सूतक काल मान्य ना होने की वजह से मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे और ना ही पूजा-पाठ वर्जित होगी।