लखनऊ: हरदोई जिले की महिला प्रधान के सीज अधिकारों को उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ ने निरस्त कर दिया है। अब महिला प्रधान अपने कार्यकाल को पूरा करते हुए ग्राम पंचायत में विकास कार्य करा सकेंगी। उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच में सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया ने यह निर्णय दिया है।
दरअसल हरदोई जिले के विकास खंड टड़ियावा के साखिन ग्राम पंचायत की प्रधान आशिया बेगम के विद्वान अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने तर्क रखा कि याचिकाकर्ता की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों को जांच लंबित रहने तक जब्त कर लिया गया था। जवाबी हलफनामे में निहित 20 फरवरी 2025 को प्रस्तुत अंतिम जांच रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता को दोषी नहीं पाया गया है और याचिकाकर्ता, जो एक ग्राम प्रधान है, के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं की गई है।
वादी और प्रतिवादी के वकीलों का तर्क सुनने के बाद जस्टिस पंकज भाटिया ने अपने आदेश में कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अंतिम जांच पहले ही समाप्त हो चुकी है और प्रधान को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
यूपी पंचायत राज अधिनियम की धारा 95 (1) (जी) के तहत पारित 30 जनवरी 2025 का आदेश, जिसे जांच कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान प्रयोग करने का अधिकार है, आगे जारी नहीं रह सकता है और तदनुसार इसे रद्द किया जाता है। याचिकाकर्ता की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां तत्काल बहाल होंगी। यदि कोई अन्य कार्रवाई प्रस्तावित है या लंबित है तो उसे कानून के अनुसार पूरा किया जाएगा।
उच्च न्यायालय से न्याय पाने के बाद ग्राम प्रधान ने बताया कि पूर्व प्रधान की मिलीभगत से उनके खिलाफ रंजिशन शिकायत की जाती है, जबकि उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर विकास कार्य कराये हैं।