Pryagraj News: लखनऊ में बुधवार देर रात वरिष्ठ साहित्यकार हरिमोहन मालवीय का निधन हो गया। हरिमोहन मालवीय ने 91 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वह कुछ दिनों पहले प्रयागराज से अपने बेटे के यहां लखनऊ में जाकर रह रहे थे। वह अस्वस्थ भी चल रहे थे। लखनऊ से उनका शव प्रयागराज लाया जाएगा। उनके निधन की सूचना पर साहित्यकारों में शोक की लहर है।
डॉ. शांति चौधरी ने बताया कि साहित्य के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान रहा है। उनका पूरा जीवन साहित्य के लिए समर्पित रहा। अपने जीवन का आखिरी समय उन्होंने साहित्य के लिए समर्पित रखा। हरिमोहन मालवीय का जन्म 26 सितंबर 1933 को हुआ था। उनकी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई थी, यहीं से उन्होंने हिंदी से MA व चित्रकला में डिप्लोमा किया था। उन्हें केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा ‘गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा ‘साहित्य भूषण सम्मान’ व विज्ञान परिषद प्रयाग द्वारा ‘शताब्दी सम्मान (2013)’ से नवाजा गया था।
हरिमोहन मालवीय साहित्य विभाग, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के पूर्व अध्यक्ष रहे। हिंंदुस्तानी एकेडेमी के पूर्व अध्यक्ष एवं सचिव रहे। उन्होंने वृंदावन शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित तानसेन कृत रागमाला का संपादन किया था जो हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी। श्वेता प्रकाशन द्वारा उनकी एक पुस्तक ‘हिंदी साहित्य सृजन और चिंतन’ प्रकाशित हुई थी जिसका लोकार्पण पूर्व राज्यपाल पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी ने किया था। इसी तरह श्री पथरचट्टी रामलीला स्मारिका का विगत 39 वर्षाें तक उन्होंने संपादन किया था। आकाशवाण़ी व दूरदर्शन से अनके रूपक एवं वार्ताएं भी प्रसारित होती रहती थीं।