मिर्जापुर:- एक बेटी ने यह साबित कर दिया कि बेटियां सिर्फ बोझ नहीं, बल्कि मां-बाप की सबसे बड़ी ताकत होती हैं। शहर कोतवाली क्षेत्र के रमईपट्टी निवासी ओम प्रकाश श्रीवास्तव, जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पर डिप्टी सीपीएम के पद पर कार्यरत हैं, जब गंभीर गुर्दा रोग से जूझ रहे थे और जीवन की उम्मीदें धीरे-धीरे टूट रही थीं—तभी उनकी बेटी डॉ. ऐश्वर्या ने बिना एक पल गंवाए अपनी किडनी देकर उन्हें नया जीवन दे दिया।
बेटी के इस फैसले ने परिवार ही नहीं, डॉक्टरों की आंखों को भी नम कर दिया। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में हुआ यह किडनी ट्रांसप्लांट पूरी तरह सफल रहा और आज पिता और बेटी दोनों स्वस्थ हैं। डॉ. ऐश्वर्या न सिर्फ एक डॉक्टर हैं, बल्कि एक सजीव उदाहरण हैं कि सच्चा प्रेम, त्याग और ममता क्या होती है। पिता की डबडबाई आंखों में सिर्फ एक ही भाव था—”मुझे जिंदगी मेरी बेटी ने लौटाई है।”
यह सिर्फ एक मेडिकल ऑपरेशन नहीं था, ये उस रिश्ते की ताकत थी जो शब्दों से नहीं, बलिदान से परिभाषित होती है। मिर्जापुर की यह बेटी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है।