लखनऊ: विद्युत संविदा कर्मियों ने मंगलवार को प्रदेशव्यापी सत्याग्रह करने का ऐलान किया, यह निर्णय लखनऊ में वरिष्ठ मजदूर नेता अरुण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में शामिल विद्युत संविदा संगठन उप्र, विद्युत संविदा कर्मचारी संघ उप्र केस्को, संविदा कर्मचारी यूनियन, निविदा संविदा सेवा समिति और विद्युत दैनिक वेतन कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने 17 दिसंबर 2024 को प्रदेश भर में निजीकरण के खिलाफ सत्याग्रह करने का निर्णय लिया। इस दिन संविदा कर्मी ड्यूटी के समय काला फीता बांधकर एक घंटे अधिक कार्य करेंगे और उपभोक्ताओं के हित में अपनी आवाज उठाएंगे।
बैठक में विद्युत विभाग की आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा संविदा कर्मियों को धरना प्रदर्शन में भाग लेने पर निकाले जाने और ब्लैकलिस्ट किए जाने का विरोध किया गया। महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आरएस राय ने कहा कि लगभग 65 हजार संविदा कर्मी जो 8-9 हजार रुपए के मामूली वेतन पर बिना सुरक्षा उपकरणों के दिन-रात 12-14 घंटे काम कर रहे हैं। अब निजीकरण के कारण अपनी आजीविका को लेकर चिंतित हैं।
राय ने निजीकरण के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्व वसूली में कमी की आड़ में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण प्रदेश की जनता के हितों के खिलाफ है। यह जनहित विरोधी कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा मंत्री और चेयरमैन के आश्वासन के बावजूद मार्च 2023 की हड़ताल में निकाले गए और हाल में छंटनी किए गए निर्दोष संविदा कर्मियों को अभी तक काम पर वापस नहीं लिया गया है। बैठक में महासंघ के विभिन्न घटक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद थे।