लखनऊ: यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अन्य भाजपा नेताओं की मौजूदगी में बीएसपी सांसद रितेश पांडे भाजपा में शामिल हुए…रितेश पांडे अंबेडकरनगर से बीएसपी के सांसद है और आज उन्होंने अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिल्ली में रितेश पांडेय को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान रितेश पांडेय ने कहा- पीएम मोदी के विजन को देखते हुए मैं भाजपा में शामिल हुआ हूं। मैं विकसित भारत की कल्पना में अपना सहयोग दूंगा। वहीं, डिप्टी सीएम ने कहा कि भाजपा के परिवार में रितेश पांडेय का स्वागत है। हम सब मिलकर काम करेंगे।
इस्तीफे में लिखा, “लंबे समय से किया जा रहा था नजरअंदाज”
बसपा सांसद ने मायावती को भेजे लेटर में लिखा कि मुझे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था। न मुझे पार्टी की बैठकों में बुलाया जा रहा था और न ही नेतृत्व के स्तर पर संवाद किया जा रहा था। मैंने आपसे और शीर्ष पदाधिकारियों से मिलने के कई प्रयास किए, मगर कोई नतीजा नहीं निकला। इसलिए मेरे पास त्यागपत्र के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है। मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।
उन्होंने आगे लिखा कि सार्वजनिक जीवन में बसपा के माध्यम से जब से मैंने प्रवेश किया, आपका मार्गदर्शन मिला। पार्टी पदाधिकारियों का सहयोग मिला। पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने मुझे हर कदम पर अंगुली पकड़कर राजनीति और समाज के गलियारे में चलना सिखाया। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान किया। पार्टी ने मुझे लोकसभा में संसदीय दल के नेता रूप में कार्य का अवसर भी दिया। इस विश्वास के लिए आपका, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करता हूं।
रितेश के इस्तीफे पर मायावती का रिएक्शन सामने आया
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मायावती द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट |
रितेश पांडेय के इस्तीफे पर मायावती का रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने रितेश का बिना नाम लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बीएसपी राजनीतिक दल के साथ ही परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के मिशन को समर्पित मूवमेन्ट भी है जिस कारण इस पार्टी की नीति व कार्यशैली देश की पूंजीवादी पार्टियों से अलग है जिसे ध्यान में रखकर ही चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार भी उतारती है।
उन्होंने आगे लिखा, अब बीएसपी के सांसदों को इस कसौटी पर खरा उतरने के साथ ही स्वंय जाँचना है कि क्या उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता का सही ध्यान रखा? क्या अपने क्षेत्र में पूरा समय दिया? साथ ही, क्या उन्होंने पार्टी व मूवमेन्ट के हित में समय-समय पर दिये गये दिशा-निर्देशों का सही से पालन किया है? ऐसे में अधिकतर लोकसभा सांसदों का टिकट दिया जाना क्या संभव, खासकर तब जब वे स्वंय अपने स्वार्थ में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं व निगेटिव चर्चा में हैं। मीडिया द्वारा यह सब कुछ जानने के बावजूद इसे पार्टी की कमजोरी के रूप में प्रचारित करना अनुचित। बीएसपी का पार्टी हित सर्वोपरि।