सोनभद्र: आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का समय पर निस्तारण न करने और शिकायतकर्ताओं से फीडबैक न लेने के मामले में जिलाधिकारी बी एन सिंह ने कड़ी कार्रवाई की है। डीएम ने सदर, नगर, घोरावल, ओबरा, पिपरी, और दुद्धी के क्षेत्राधिकारियों का वेतन रोकने का निर्देश दिया है। साथ ही, 22 थानों में से 19 थानाध्यक्षों के वेतन भी रोकने का आदेश जारी किया गया है।आईजीआरएस पोर्टल के निस्तारण में शिथिलता को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, और 6 सीएचसी/ब्लॉक पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारियों का वेतन रोकने के साथ-साथ उनसे जवाब भी तलब किया गया है।
इसी प्रकार, नगरपालिका राबर्ट्सगंज, अनपरा नगर पंचायत, और ओबरा के अधिशासी अधिकारियों का भी वेतन रोका गया है। डीएम ने 7 एडीओ पंचायत, 4 बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, 4 खंड शिक्षा अधिकारी, और 3 खंड विकास अधिकारी के वेतन भी रोकने का आदेश दिया है। इस फैसले का उद्देश्य शिकायतों के निस्तारण में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना है।
मामले में जिला पूर्ति अधिकारी, पुर्ति निरीक्षक, और प्रमुख विभागों के अधिकारियों का वेतन भी रोकने का आदेश दिया गया है। साथ ही, जिले के चारों तहसीलों के उप जिलाधिकारी, तहसीलदार ओबरा, जिला कृषि अधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी राबर्टसगंज, जिला उपायुक्त मनरेगा, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी, सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, सहायक आयुक्त सहकारिता जैसे अधिकारियों का भी वेतन रोकने और स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है।
मुख्य सचिव के निर्देशों के तहत जन शिकायतों की जांच की गई। जांच में यह सामने आया कि राजस्व अधिकारियों/कर्मचारियों ने न तो शिकायतकर्ताओं से संपर्क किया और न ही स्थलीय सत्यापन किया, जो कि आईजीआरएस पोर्टल की प्रक्रिया का हिस्सा है। इस कारण डीएम ने दिसंबर 2024 के महीने का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
डीएम ने यह स्पष्ट किया कि वेतन आहरण तभी होगा जब संबंधित विभाग यह प्रमाणित करेंगे कि सभी शिकायतों का निस्तारण शिकायतकर्ता से संपर्क और स्थलीय सत्यापन के बाद किया गया है। डीएम ने कहा कि आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का निस्तारण समय से न किए जाने और संबंधित शिकायतकर्ताओं से वार्ता करके फीडबैक न लिए जाने के कारण यह कड़ी कार्रवाई की गई है।