हरदोई: बेनीगंज क्षेत्र में पौराणिक चौरासी कोसी परिक्रमा का तीसरा पड़ाव उमरारी गांव में लगने से यहां के पंथी माता मंदिर सहित सूर्यकुंड तीर्थ की छबि देखते बनती है, पर इस बार फाल्गुन मास यानी 1 मार्च को नैमिष से शुरू होने वाली 84 कोसीय परिक्रमा प्रारंभ होने को है, तमाम प्रकार की तैयारियां शासन प्रशासन एवं पड़ाव प्रमुखों के द्वारा की जा रही है। सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं को अमली जामा पहनाए जाने के लिए जिम्मेदार रात दिन एक कर रहे हैं, पर तीसरे पड़ाव उमरारी गांव में पंथी माता मंदिर के समीप सूर्यकुंड तीर्थ सूख चुका है जबकि इसकी सुंदरता जल भरा होने के बाद ही देखते बनती है।
बताते चलें कि यहां 2 वर्ष पूर्व निरीक्षण करने पहुंचे तत्कालीन जिलाधिकारी मंगला प्रसाद ने मंदिर एवं तीर्थ के जीर्णोद्वार की बात कही थी, स्थानीय विकास एवं पंचायतीराज को आदेशित भी किया था, जहां कागजी कोरम पूरे करते हुए जिम्मेदारों ने पंथी माता मंदिर पर निगरानी हेतु कुछ सीसीटीवी कैमरे लगवाए और तीर्थ में जल भरवाया जबकि आस पास सौंदरीकरण के नाम पर पहले से लगी वेरीकेटिंग एंगल की पेंटिंग कराई गई, रोशनी के लिए कुछ एलईडी लाइट एवं साफ सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद किया गया था। आज जब डंका बजने के चंद दिन शेष है तो यहां उपरोक्त व्यवस्थाओं में ग्रहण लगा दिख रहा है।
लोगों के बताएं अनुसार रोशनी के लिए लगाई गई एलइडी लाइट परिक्रमा मेले के तुरंत बाद गायब कर दी गई, तीर्थ सूख गया है, निगरानी कैमरे गायब है। यहां के जानकारों ने बताया कि तीर्थ और मंदिर प्रांगण के नजदीक ग्राम पंचायत अध्यक्ष का निवास है जिनके सिपह_सलाहकार मंदिर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाते रहते हैं, बावजूद इसके सरकारी ख़ज़ाने से लगा माल गायब कैसे और कहां हो गया। क्या सौंदर्यीकरण हेतु लगाए गए गायब माल को पुनः परिक्रमा मेला के दौरान जिलाधिकारी के आदेश पर जिम्मेदार बरामद करेंगे या फिर सरकारी खजाने पर डाका डालने की तैयारी करेंगे?
दबे कुचले सही शब्दों को पिरोया जाए तो सूर्यकुंड में सप्ताह पूर्व ही कुछ लोगों द्वारा मछलियों को पकड़े जाने का घृणित कार्य पंपिंग सेट लगाकर किया जा रहा था इसके बारे में कुछ लोगों द्वारा क्षेत्रीय लेखपाल को जानकारी भी दी गई पर मछली पकड़ने वाले लोग अपने कार्य में कामयाब हुए। अब देखना होगा कि आस्था के पथ पर सूख रहे सूर्य कुंड का रुख जल की ओर मोड़ा जाएगा या स्थितियां जस की तस बनी रहेगी।