ज्ञान और केवल ज्ञान ही लोगों को दुख से बाहर निकाल सकता है: अम्बरीष

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पाली/हरदोई: शिव सत्संग मंडल आश्रम एवं सिद्धनाथ बाबा मंदिर ग्राम हुसैनपुर धौकल में नववर्ष आध्यात्मिक चेतना और साधना वर्ष के रूप में रुद्राभिषेक कर मनाया गया। इस अवसर पर जहां सभी ने सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। नववर्ष से अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ने का निर्णय लिया।

इस अवसर पर शिव सत्संग मंडल के धर्म अध्यात्म प्रेरक अंबरीष कुमार सक्सेना ने कहा कि
नव-वर्ष का उत्सव वास्तव में समय का सम्मान करना है। समय का सम्मान करना मन का सम्मान करना है। मन का सम्मान करने का अर्थ है स्वयं का सम्मान करना। यदि स्वयं का सम्मान करने का यह तरीका जानना है, तो स्वयं को पवित्र बनाना होगा।


उन्होंने बताया कि यद्यपि हम भारतीयों के द्वारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। तथापि लोक व्यवहार की दृष्टि से ईस्वी सन् की परंपरा भारत व सम्पूर्ण विश्व में अभी भी प्रचलित है। सनातन हिन्दू वैदिक संस्कृति में सभी मतों और संप्रदायों का समान रूप से आदर है।


वैदिक मतानुसार हमें सब ओर से शुभ, कल्याणकारी विचार और श्रेठताएं संग्रहित करनी चाहिए। इस दृष्टि से नव उल्लास, नवोत्साह और नव उमंग के साथ अंग्रेजी नववर्ष का यह सूर्य राष्ट्र के लिए सर्वथा शुभ और आह्लादकारी सिद्ध हो।

ज्ञान ही लोगों को दुख से बाहर निकाल सकता है: अम्बरीष

 

कहा कि समय आपके शरीर को परिवर्तित करता ही है, लेकिन आपके भीतर भी समय को परिवर्तित करने की क्षमता है। आप किसी भी समय को बेहतर बना सकते हैं। कुछ लोग अच्छा समय आने की प्रतीक्षा करते हैं, तो कुछ लोग हर समय को अच्छा समय बना लेते हैं। जब आप आध्यात्मिक पथ पर होते हैं तो समय भागता है, अन्यथा समय घिसट रहा होता है। जब आपके मन की स्थिति सही नहीं है, तो समय एक बाधा है। तो आइए, हम संकल्प लें कि आने वाले वर्ष के प्रत्येक क्षण का उपयोग समाज और राष्ट्र पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए करेंगे।


कहा कि आज उमंग, उत्साह व आशाओं का दीप मन में जलाकर मानवता में नई क्रांति का श्रीगणेश आवश्यक है। वर्तमान में सारा विश्व काम, क्रोध, लोभ, मोह अहंकार रूपी विकृतियों के कारण अनाचार, अत्याचार, व्यभिचार आतंकवाद से कराह रहा है। उन्होंने स्पष्ट बताया कि ज्ञान और केवल ज्ञान ही लोगों को दुख से बाहर निकाल सकता है। भौतिकता लोगों को दुख से बाहर नहीं निकाल सकती। हां, थोड़ी सी भौतिक चीजें क्षणिक राहत अवश्य देती हैं, लेकिन यह ज्ञान ही है, जो वास्तविक और दीर्घकालिक राहत दिलाता है। इस वर्ष यह सोचिए कि हम गांव-गांव तक यह ज्ञान कैसे पहुंचाएं।


मित्र परिवार के संयोजक अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि नववर्ष आराध्य भगवान महादेव जी की असीम अनुकम्पा से सनातन परंपरा से “मित्र परिवार “भारत” के सभी सम्मानित सदस्यो के साथ भगवान का भजन पूजन कर सामूहिक रूप से भोज कर बहुत ही आनन्द और उल्लास के साथ मनाया । भगवान महादेव की ही कृपा है जो समय समय पर वो अपनी सेवा का मौका हम सभी मित्र परिवार के परिवार जनों के साथ मौका दे देते है । हमसे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को बाबा महादेव इस वर्ष 2024 को अपना विशेष आशीर्वाद देकर सभी भक्त जनों का जीवन खुशियों और उल्लास से भर देगे ।

 ज्ञान ही लोगों को दुख से बाहर निकाल सकता है: अम्बरीष

 


आज मुख्य रूप से रूद्राभिषेक में शिव सत्संग मंडल के अध्यक्ष आचार्य अशोक जी, मित्र परिवार के संस्थापक सदस्य गोपाल त्रिपाठी, कोष प्रमुख शिव प्रसाद श्रीवास्तव, संस्थापक सदस्य आशुतोष मिश्र, प्रभाकर बाजपेई, योगेंद्र यादव अनूप शर्मा, संतोष कुशवाहा, अनिल कुमार सिंह, राधा गोपाल त्रिपाठी, कंचन गुप्ता, महात्मा नाहर सिंह, डॉ रामावतार रामनिवास देव सिंह, पंकज कुमार सिंह, अंकित, कंचन, पंकज कुमार सक्सेना,सत्यम सक्सेना, नवीन गुप्ता, कमलेश यादव, जमुनादीन, महात्मा शांतानंद, महाराज प्रदीप मिश्रा, संदीप श्रीवास्तव, अजय कुमार गुप्ता, संजीव चौरसिया, आमोद अग्निहोत्री, छवि सक्सेना, प्रिंसी, शुभी, अनमोल यादव आदि प्रमुख से उपस्थित रहे ।

रिपोर्ट-जनार्दन श्रीवास्तव

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