रामपुर: बेसिक शिक्षा विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें फर्जी नियुक्तियों और प्रमोशन का खेल चल रहा था। इस मामले में विभाग के 7 शिक्षक, एक सहायक लेखाकार और 2 लेखा अधिकारी जांच के घेरे में हैं। मामले की शुरुआत शिक्षिका ज्ञानेश्वरी देवी की फर्जी नियुक्ति से हुई, जो ऊंची चौपाल स्थित जवाहरलाल पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत थीं। जांच में पता चला कि उनके पति नेगपाल सिंह, जो विभाग में सहायक लेखाकार के पद पर थे, ने अपनी पत्नी की फर्जी नियुक्ति करवाई थी। इस मामले में पुलिस ने नेगपाल सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जोन कमिश्नर के आदेश पर गठित जांच टीम में अपर आयुक्त शशि भूषण, एडी बेसिक बुद्धिनाथ सिंह और जिला कोषाधिकारी रंजीत सिंह शामिल हैं। टीम ने बीएसए कार्यालय में लेखाधिकारी कार्यालय के दस्तावेजों की जांच की, जिसमें नेगपाल सिंह के प्रमोशन से जुड़े कागजात भी शामिल हैं। जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सहायक लेखाकार के करीबी माने जाने वाले 7 शिक्षकों के बैंक खातों में लाखों रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है। जांच टीम इन सभी लेनदेन की बारीकी से छानबीन कर रही है। इस घोटाले ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
वर्तमान में जेल में बंद नेगपाल सिंह के निलंबन की प्रक्रिया में भी कुछ पेचीदगियां सामने आई हैं, जिन पर विभाग विचार कर रहा है। पूरे मामले में पुलिस और विभागीय दोनों स्तरों पर जांच जारी है। दरअसल पिछले साल सहायक लेखाकार के जब प्रमोशन में गड़बड़ी की बात सामने आई थी तब डीएम के आदेश पर तत्कालीन बीएसए ने आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा निदेशालय को पत्र लिखकर कार्रवाई की संस्तुति की थी, जिस पर पांच जनवरी 24 को निदेशालय के अपर निदेशक रविंद्र कुमार ने बीएसए को जवाब दिया था कि उक्त नाम का कोई भी सहायक लेखाकार विभाग की ज्येष्ठता सूची में ही नहीं है।
विभाग ने नेगपाल को अपना कर्मचारी ही नहीं माना था। इस आदेश के बाद प्रमोशन को रद्द करने की प्रक्रिया लेखा विभाग को करनी थी, लेकिन मामला यहां भी फंस गया और कार्रवाई का भी पेच फंस गया। अब सहायक लेखाकार को जेल भेजा जा चुका है, लेकिन विभागीय अधिकारी जांच की बात कहते हुए निलंबन की कार्रवाई से बच रहे हैं। सहायक लेखाधिकारी नेगपाल सिंह को किसने अपॉइंट किया, यह साफ नहीं है। अब अकाउंट्स डिपार्टमेंट ने शासन को पत्र लिखा है। विभाग के सूत्रों के मुताबिक अब शासन को पत्र लिखा गया है। पुलिस और विभागीय जांच के शिकंजे में फर्जी अपॉइंटमेंट और सैलरी देने के साथ ही असिस्टेंट अकाउंटेंट के प्रमोशन के मामले में दो अकाउंट्स ऑफिसर भी जद में हैं।