सियाचिन ग्लेशियर में बुधवार को करीब साढ़े तीन बजे भारतीय सेना के कई टेंट में आग लग गई। हादसे में रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर कैप्टन अंशुमान सिंह (Captain Anshuman Singh) शहीद हो गए। 5 माह पहले 10 फरवरी को लखनऊ के पारा मोहान रोड स्थित जिस घर में कैप्टन अंशुमान सिंह की शादी की शहनाई गूंजी थी, वहां मातम पसर गया। कैप्टन अंशुमान 15 दिन पहले ही सियाचिन गए थे। अंशुमान मूल रूप से देवरिया के रहने वाले थे।
सेना की मेडिकल कोर और कमांड अस्पताल के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अंशुमान सिंह के घर पहुंचकर उनके पिता रवि प्रताप सिंह को कैप्टन अंशुमान सिंह (Captain Anshuman Singh) के शहीद होने की सूचना दी। अंशुमान सिंह की पत्नी इंजीनियर सृष्टि सिंह पठानकोट की रहने वाली हैं। वह नोएडा में रहकर एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करती हैं। अंशुमान के लखनऊ वाले घर में उनके पिता रवि प्रताप सिंह, मां मंजू सिंह, बहन तान्या सिंह और भाई घनश्याम सिंह रहते हैं। उनके पिता रवि प्रताप सिंह सेना में JCO थे।
पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार
शहीद कैप्टन अंशुमान सिंह (Captain Anshuman Singh) के रिश्तेदार अजीत सिंह ने बताया कि पहले सूचना मिली कि विशेष विमान से पार्थिव शरीर लखनऊ एयरपोर्ट आएगा। सभी रिश्तेदार और नजदीकी लोग लखनऊ पहुंच गए थे। बाद में खबर आई कि गोरखपुर एयरपोर्ट पर पार्थिव शरीर आएगा। उनका अंतिम संस्कार देवरिया के पैतृक गांव में होगा।
15 दिन पहले ही कैंप गए थे
पढ़ाई के बाद अंशुमान का चयन आर्मर्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे में हो गया। वहां से MBBS करने के बाद कैप्टन अंशुमान सिंह सेना की मेडिकल कोर में शामिल हुए। आगरा मिलिट्री हॉस्पिटल में ट्रेनिंग के बाद वहीं अंशुमान की तैनाती हो गई थी।पिछले दिनों कश्मीर के पुंछ सेक्टर में तैनात एक बटालियन के वह मेडिकल आफिसर बने। वहां से 15 दिन पहले ही सियाचिन कैंप गए थे।