लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 20 मई से 15 जून तक समर कैंप आयोजित किया जाएगा। इस योजना को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की सेवाएं ली जाएंगी। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का मानदेय जारी किया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए विशेष प्रावधान ।
गौरतलब है कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का अनुबंध 11 माह का होता है और उन्हें गर्मी की छुट्टियों में वेतन नहीं मिलता। लेकिन समर कैंप के संचालन को ध्यान में रखते हुए, इस वर्ष उन्हें विशेष मानदेय देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये की बजाय 6,000 रुपये तथा अनुदेशकों को 9,000 रुपये के स्थान पर 6,000 रुपये दिए जाएंगे।
शिक्षामित्रों की नाराजगी
कुछ शिक्षामित्रों ने इस फैसले पर असंतोष जताया है। एक शिक्षामित्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि शिक्षकों को पूरा वेतन मिलता है, लेकिन शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को कम राशि दी जा रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग का उद्देश्य
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, समर कैंप का उद्देश्य छात्रों को गर्मी की छुट्टियों में भी सीखने की प्रक्रिया से जोड़े रखना है। सरकार का कहना है कि इस योजना से छात्रों को लाभ मिलेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
Lekin summer camp ki avadhi itni lambi nhi honi chahiye. Summer camp baccho ko enjoy karne ke liye hota hai aur ye 25 dino ka summer camp , is tarah ki bheeshan garmi me torture hai bas. Summer camp ek hafte ya 10 din tak hi hona chahiye. Uske bad ke din summer vacations, is tarah teacher bhi khush bacche bhi.