फर्जी फर्मों पर हो रहा करोड़ों का भुगतान, पंचायती राज विभाग में बिना अस्तित्व की फर्मों पर लगाया जाता लाखों का डोंगल

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पंचायती राज विभाग में बिना अस्तित्व की फर्मों पर लगाया जाता लाखों का डोंगल

शाहाबाद/हरदोई: ग्राम पंचायत विकास विभाग में जिम्मेदारों द्वारा अस्तित्व विहीन फर्मों पर भुगतान किए जा रहे हैं।इस बात को सभी अधिकारी भी जानते हैं किंतु हरे नोटों के लालच में सारा खेल बदस्तूर जारी है। ज्ञात हो ग्राम पंचायत विकास विभाग में ब्लॉक से लेकर ग्राम पंचायत तक कोई भी प्रधान या सिक्रेटरी बिना किसी फर्म के एक रुपए का भी भुगतान नहीं कर सकता है। लेकिन फिर भी विकास अपनी पूर्ण गति से करवाया जा रहा है।

रोज लाखों रुपए का डोंगल लगाकर फर्जी फर्मों पर भुगतान किया जा रहा है। हर ग्राम पंचायत प्रधान ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम की फर्म खुलवा ली हैं। जी एस टी रजिस्ट्रेशन करवा कर उन पर पैसे का लेनदेन किया जा रहा है।लेकिन वे फर्में जीएसटी रिटर्न फाइल कर रही हैं हर महीने या नहीं इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।शाहाबाद ब्लॉक में ही ऐसे कई लोग हैं जिनकी फर्मों पर 7% देकर रोज लाखों रुपए का भुगतान सिक्रेट्री द्वारा किया जा रहा है।

इन रजिस्टर्ड फर्मों का कहीं कोई अस्तित्व नहीं है।किसी फर्म के नाम की कहीं कोई दुकान नहीं है।रिटर्न भी समाधान योजना के तहत 6 माह में दाखिल कर हर माह लाखों रुपए के राजस्व को चुना लगाया जा रहा है। सिक्रेटरी और फर्म के मालिक के बीच गठजोड़ फेविकोल से भी मजबूत जोड़ है। सिक्रेट्री ने रात को एक लाख का डोंगल लगाया फर्म पर।और फोन कर दिया की एक लाख लगाए हैं।सुबह 93000 रुपया ईमानदारी से सिक्रेट्री के पास पहुंचा दिया जाता है।और सादे फर्म के वाउचर दे दिए जाते हैं।

सिक्रेटरी अपने हिसाब से वाउचर में सामग्री भर लेता है।ग्राम पंचायतों में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय हों या मिनी सचिवालय हो या स्ट्रीट लाइट हो मनरेगा को छोड़कर सारा कुछ विकास इन्ही फर्मों के माध्यम से किया जाता है।और तो और सिक्रेटिरियों ने भी अपने रिश्तेदारों के नाम की फर्में खोल रखी हैं। कुछ फर्मे ब्लॉक के लोगों ने अपने चहेतो के नाम बनवा रखी हैं जिन का दुरुपयोग करके फर्जी भुगतान करवाया जा रहा है।

आपको बताते चलें कि इससे पहले शाहाबाद ब्लाक में स्ट्रीट लाइट के मामले को लेकर कई फर्मो को ब्लैक लिस्टेड किया गया था उसके बावजूद भी फ़र्ज़ी फर्मो के गोरखधंधे पर लगाम नहीं लग पा रहा है जिन पर सामग्री का क्रय किया जा रहा है।इन फर्मों पर किए जा रहे भुगतान का राजस्व जमा किया जा रहा है या नहीं ये अधिकारी भी कभी नहीं पूछते।

हर फाइल का आडिट भी किया जाता है। उसमे भी सिर्फ वाउचर देखे जाते यह नहीं देखा जाता कि जो समान बिल बाउचर में क्रय किया गया है ब्रांच या दुकान कहां है।बाकी आडिट का मतलब सारा विभाग ही नहीं आम आदमी भी जानता है। फाइल के एमाउंट के हिसाब से चढ़ावा चढ़ा कर आडिट फाइनल होता है।इनमे कुछ फर्म तो ऐसी हैं जिनका सालों का जीएसटी रिटर्न पेंडिंग है।फिर भी जिम्मेदार लोग निजी लाभ के लिए गलत कार्य करने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब देखना है की इन फर्जी फर्मो पर क्या कार्रवाई होगी या नहीं।

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