Hardoi News: सावधानी बरतें और लू से बचेंः- मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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Hardoi News: शासन द्वारा इस साल मार्च से लेकर जून माह तक तेज गर्मी और लू चलने का अलर्ट जारी किया गया। इसी क्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोहताश कुमार ने लू और गर्मी से बचाव के बारे में बताया कि शासन ने अलर्ट जारी किया है कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में गर्मी ज्यादा होगी और लू का स्पैन भी बड़ा हो सकता है, इसलिए इससे बचाव के लिए सावधानी बरतें।

लू/गर्मी से बचाव के लिए घर से बगैर नाश्ता किये या खाना खाए बगैर न निकलें। घर से बाहर निकलें तो सिर को गीले कपड़े से ढंके, छाता और धूप का चश्मा लगायें और पानी की बोतल अवश्य साथ में रखें। सूती, हलके रंग के और पूरी बांह के कपड़े पहने, आँखें सूरज की रोशनी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं। खूब पानी पीयें, ठंडे पानी से नहायें, खूब पानी पीकर शरीर को हाईड्रेटेड रखें, ताजा खाना खाएं।

दोपहर में 12 से तीन के बीच निकलने से बचें। थोड़ी-थोड़ी देर में नीबू पानी, तरबूज, खरबूजा, खीर, ककड़ी, ओ आरएस छांछ, मट्ठा, आम पना, लस्सी आदि का सेवन करें। पाचन दुरुस्त रखने के लिए प्रोबायोटिक्स लें। खुले हवादार कमरे में रहें। घर/कार्यस्थल पर सूर्य की सीधी रौशनी से बचने के लिए पर्दे लगायें जानवरों को छायादार स्थानों पर रखें हीट वेव यानी लू से बच्चों, बीमार, बुजुर्गों, गर्भवती, मजदूरों और फील्ड पर कामकरने वालों ज्यदा खतरा है इसलिए इनका विशेष ध्यान रखें।

उन्होंने बताया कि बंद व अधिक गर्म स्थान वाले स्थान पर खाना न बनाएँ घर से बाहर जाते समय तंग, छोटे व गहरे रंग के कपड़े न पहने। अत्यधिक धूप/गर्मी में काम न करें। हाईड्रेशन के लिए शराब, एनर्जी और शुगरी ड्रिंक, चाय कॉफ़ी, कार्बाेनेटेड ड्रिंक के सेवन से बचें । अत्यधिक प्रोटीनयुक्त व बासी भोजन का सेवन न करें।

धूप में खड़ी गाड़ियों में बच्चों और जानवरों को अकेला न छोड़ें नंगे पैर घर से बाहर न निकलें। हीट स्ट्रोक या लू लगने के लक्षण आने पर तेज बुखार जिसमें तापमान 104 डिग्री फारेनहाईट या इससे ज्यादा चला जाता है बेहोशी आ जाती है, मरीज कोमा में भी जा सकता है।

इसके अलावा चक्कर आना, सिर में दर्द, उलटी आना, कमजोरी, थकान, कन्फ्यूजन होना, गाढ़े रंग का पेशाब होना, मांसपेशियों और पेडू में अकड़न होना आदि हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएँ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि यह बहुत ही जरूरी है कि हीट स्ट्रोक, हीट रैश और हीट क्रैम्प के लक्षणों के बारे में पता हो जिससे कि समय से इसका प्रबंधन किया जा सके।

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