ATM से ज्यादा बार पैसे निकालने पर ज्यादा चार्ज, मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर फाइन, यूपीआई के इनएक्टिव मोबाइल नंबर हटेंगे

Saeed Ahmed
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Highlights
  • आरबीआई का पॉजिटिव पे सिस्टम होगा लागू
  • यूपीआई के इनएक्टिव मोबाइल नंबर हटेंगे
  • रसोई गैस के दामों की भी की जाएगी समीक्षा
  • होम लोन की घटेगी किश्त

1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो रहा है। नए साल के बदलाव और नए नियम इसी दिन से लागू होंगे। इस बार भी कई ऐसे नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका असर सीधा आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। एटीएम से अधिक बार पैसे निकालने पर आपको 17 की जगह 19 रुपये चार्ज देना होगा। ऐसा ही बदलाव बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस को लेकर भी किया गया है।

एटीएम ट्रांजेक्शन पर देने होंगे 23 रुपये

एटीएम से निकासी पर लगने वाला शुल्क बढ़ने जा रहा है। एक महीने में शुल्क मुक्त ट्रांजेक्शन लिमिट पार होने के बाद प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर वसूले जाने वाले शुल्क में दो रुपये की बढ़ोतरी की जा रही है। बैंकों के प्रस्ताव को आरबीआई ने मंजूरी दी है।

ये नई बढ़ोतरी लागू होने पर शुल्क मुक्त ट्रांजेक्शन लिमिट खत्म होने के बाद प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये का चार्ज वसूला जाएगा। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, कोई भी ग्राहक एक महीने में अपने बैंक के एटीएम से बिना किसी शुल्क के पांच ट्रांजेक्शन (वित्तीय और गैर वित्तीय) कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, अगर आप दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप मेट्रो सिटी में एक महीने में अधिकतम 3 और गैर-मेट्रो शहर में पांच ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।

खातों में मिनिमम बैलेंस को लेकर बदला नियम

जनधन सहित कई योजनाओं के खाते में लोग बैलेंस नहीं रखते। अब इन खातों सहित बचत खातों में भी बैलेंस रखना होगा। अब बचते खाते में यदि मिनिमम बैलेंस नहीं रखते हैं तो आपको जुर्माना देना होगा।
खास बात यह है कि यह जुर्माना राशि शहरी व ग्रामीण शाखाओं में अलग-अलग होगी इसलिए यह जानकारी खाता धारकों को अपने बैंक से लेना होगी। साथ ही उसी के मुताबिक अपने खाते में मिनिमम रकम रखना होगा।

यूपीआई के इनएक्टिव मोबाइल नंबर हटेंगे

यूपीआई पेमेंट सर्विस से जुड़ा नया नियम एक अप्रैल से लागू हो रहा है। नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया ने धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट का उपयोग करने को कहा है। इसके तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को 31 मार्च से पहले अपने डेटाबेस को अपडेट करना होगा ताकि इनएक्टिव या बदले हुए मोबाइल नंबरों को हटाया जा सके।

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